1857 की क्रांति को सावरकर स्वतंत्रता का नाम नही देते तो हमारे बच्चे आज भी उसे विद्रोह ही मानते – गृह मंत्री अमित शाह

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If Savarkar did not give the name of freedom to the revolution of 1857, our children still consider him a rebellion - Home Minister Amit Shah

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा जारी किए गए अपने संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में भाजपा ने महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्री फुले और वीर सावरकर को भारत रत्न पुरस्कार देने की केंद्र से पार्टी की मांग करने की घोषणा की हैं। घोषणा पत्र में वीर सावरकर को भारत रत्न देने की घोषणा के बाद से ही वीर सावरकर के नाम पर भाजपा और कांग्रेस में जुबानी जंग छिड़ी हुई हैं। कांग्रेस सहित अन्य पार्टिया इसका विरोध करने में जुटी हुई हैं। विपक्षी पार्टियों के इस विरोध पर खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विरोधियो को जवाब देते हुए कहा कि अगर वीर सावरकर नहीं होते तो 1857 की क्रांति इतिहास नही बनती। शाह ने विरोधियो पर जमकर तंज भी कसा हैं।

सावरकर ने दिया था क्रांति को स्वतंत्रता संग्राम का नाम 

बनारस के हिंदू विश्वविद्यालय में “गुप्तवंशक वीरः स्कंदगुप्त विक्रमादित्य का ऐतिहासिक पुनः स्मरण एवं भारत राष्ट्र का राजनीतिक भविष्य” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन करने पहुँचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने वाले विवाद पर उन्होंने विरोधियो पर निशाना साधा हैं। शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहाँ की “वीर सावरकर ने ही 1857 की क्रांति को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम देने का कार्य किया था। वरना आज भी हमारे बच्चे उसे विद्रोह के नाम से जानते।” शाह ने यह भी कहा कि “हमे अपना दृष्टिकोण बदलना होगा। वामपंथियो को, अंग्रेज इतिहासकारों को दोष देने से कुछ नही होगा। क्या इतिहास का पुर्नलेखन नही कर सकते हैं। हमारे देश के इतिहासकारों को एक नए दृष्टिकोण के साथ इतिहास लिखने का अब समय आया हैं।

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